JO DIN NE KAHA

Wednesday, 26 December 2012

दिल्ली तू तो बन बैठी महारानी है


दिल्ली तू तो बन बैठी महारानी है
लुटी सड़क पे मगर तेरी दीवानी है
               सूख गया क्या आँखों का पानी दिल्ली
                रहीं बेटियां लुटती तू अनजानी है
अब तेरा आँचल महफूज नहीं दिल्ली
लड़ें मौत से आज किसी की निशानी है
              खुद के तू गुणगान खूब करती दिल्ली
              मगर हकीकत तेरी यही कहानी है
सना खून से तेरा आँचल है दिल्ली
अब ना रही चुनरिया तेरी धानी है
              बड़े बड़े वादे करती हो तुम दिल्ली
              तेरी ये करतूत मगर हैवानी है
जहाँ गूंजते माँ के जयकारे दिल्ली
क्यूँ दैत्य बाहू पाशों में फसी भवानी है
               सड़े गले क़ानून बदल दो अब दिल्ली
               ताकी ना कर पाए कोई मनमानी है
अब भी तेरा खून नहीं गर खौला तो
खूब समझना लहू हुआ अब पानी है
डॉ आशुतोष मिश्र
आचार्य नरेन्द्र देव कॉलेज ऑफ़ फार्मेसी
बभनान, गोंडा, उत्तर प्रदेश
मोबाइल न० ९८३९१६७८०१

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