साहित्य के एक
उत्कृष्ट सम्मलेन में
पुज रहे थे वो
और झुक रहे थे
सैकड़ों युवा साहित्यकार
उनके चरणों में
मानवीय मूल्यों के चिंतन पर
उनकी कृति ने,
कर दिया था उन्हें लब्ध प्रतिष्ठित
टयूब लाईट की दूधिया रोशनी में
गैलरी में सजी
सैकड़ों सुन्दर किताबों में
दमक रही थी अलग
उनकी एक सुन्दर किताब
किताब की जिल्द पर छपी थी
दरिंदों के हाथों में छटपटाती
खूबसूरत अवला के रूप में
मानवता की तस्वीर
जिल्द की ख़ूबसूरती से प्रभावित
मुड गए मेरे कदम
तीन सितारा होटल की
तीसरी मंजिल के
उनके कमरे की तरफ
और
दस्तक देते ही खुल गए
भूलवश बंद न किये गए दर के पट
और सहसा ही खिसक गयी
मेरे पैरों तले की जमीन भी
कमरे के भीतर
एक अर्ध नग्न षोडशी कन्या की
नग्न पीठ पर
कहानी लिख रही थी
उस लब्ध प्रतिष्ठित कृतिकार की उंगलियाँ
वो षोडशी थी एक नवोदित साहित्य सर्जक
और छूना चाहती थी आकाश
डॉ आशुतोष मिश्र/आचार्य नरेन्द्र देव कॉलेज ऑफ़ फार्मेसी/बभनान, गोंडा, उ. प्र. मोबाइल नो 9839167801
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