तुम्हारी बेचैनी ये नहीं की
तुम्हारे पास ये नहीं वो नहीं
तुम्हारी बेचैनी ये है कि
उसके पास ये है वो है
तुम्हारी बेचैनी ये नहीं कि
सूख रहे हैं तुम्हारे खेत
तुम्हारा बेचैन होना
उसके खेतों का लहलहाना है
तुम इसलिए भी बेचैन नहीं
कि मिलती है सूखी रोटी तुम्हे
तुम्हारी बेचैनी तो
उसकी रोटियों पे चुपड़ा घी है
दुखी, पीड़ित, परेशान होना
कारन नहीं तुम्हारी बेचैनी का
तुम बेचैन सिर्फ इसलिए हो
वो खुशहाल क्यूँ है
डॉ आशुतोष मिश्र
आचार्य नरेन्द्र देव कॉलेज ऑफ़ फार्मेसी
बभनान, गोंडा, उ. पर
मोबाइल नो 9839167801
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