ला माँ मुझे कमंडल दे दे
लेके माँ के दर जाऊँगा
हाथ जोड़कर नमन करूंगा
भक्ति मांग कर ले आऊंगा
इस भिक्षा से ही दोनों की
फिर मैं भूख मिटाऊंगा
खुद भी इसका पान करूंगा
तुझको पान कराऊंगा
ते अर्जित धन ऐसा होगा
खर्च करो दिन रात बढेगा
जब अनंत रत्नाकर जैसी
हो जायेगी ये संचित निधि
अविरल धरा स्वयं बहेगी
इस अविरल धरा से फिर मैं
सारा जग नहलाऊँगा
ला माँ मुझे कमंडल दे दे.........
डॉ आशुतोष मिश्र
आचार्य नरेन्द्र देव कॉलेज ऑफ़ फार्मेसी
बभनान, गोंडा, उ. पर
मोबाइल नो 9839167801
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